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शनि की साढ़ेसाती और ढैया: प्रभाव, उपाय, और जीवन पर उनका महत्व

शनि की साढ़ेसाती और ढैया का विषय एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल ज्योतिषीय अवधारणा है। इसे समझना और इसके प्रभावों से निपटना हर व्यक्ति के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है। इस नोटिस में, शनि की साढ़ेसाती और ढैया के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है, ताकि आप इस विषय को गहराई से समझ सकें और इसे वीडियो में प्रस्तुत कर सकें।

शनि ग्रह का परिचय और महत्व

शनि ग्रह को वैदिक ज्योतिष में न्यायाधीश माना गया है। इसे कर्मफल का दाता कहा जाता है, जो व्यक्ति के अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार परिणाम देता है। शनि ग्रह की गति धीमी होती है, और यह एक राशि में लगभग 2.5 वर्ष तक रहता है। शनि का प्रभाव दीर्घकालिक और स्थायी होता है। इसके कारण व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, संयम, और धैर्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शनि व्यक्ति के जीवन में कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ ला सकता है, लेकिन इन्हीं चुनौतियों से व्यक्ति को सीखने और आत्मनिरीक्षण का अवसर मिलता है।

साढ़ेसाती का परिचय

साढ़ेसाती एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय अवधारणा है, जो तब शुरू होती है जब शनि ग्रह किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा से पहले वाली राशि में प्रवेश करता है। यह अवधि तब तक चलती है जब तक शनि चंद्रमा से अगली राशि को पार नहीं कर लेता। साढ़ेसाती की कुल अवधि 7.5 वर्षों की होती है। इस अवधि को तीन चरणों में विभाजित किया गया है: प्रारंभिक चरण, मध्य चरण, और अंतिम चरण।

ढैया का परिचय

ढैया वह अवधि होती है जब शनि ग्रह चंद्रमा से चौथी या आठवीं राशि में गोचर करता है। यह अवधि लगभग 2.5 वर्षों की होती है। ढैया का प्रभाव भी जीवन में चुनौतियाँ और समस्याएँ ला सकता है, लेकिन यह साढ़ेसाती की तुलना में कम तीव्र होता है। ढैया के दौरान व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक समस्याएँ, और पारिवारिक विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

साढ़ेसाती और ढैया का जीवन पर प्रभाव

शनि की साढ़ेसाती और ढैया का विस्तृत विवरण और उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का वर्णन एक व्यापक और गहन विषय है।

शनि की साढ़ेसाती के तीन चरणों का विस्तार

शनि की साढ़ेसाती के तीन चरण होते हैं, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं पर अलग-अलग प्रभाव डालते हैं। इन तीन चरणों को समझना और उनके अनुसार उपाय करना अत्यंत आवश्यक है।

1.प्रथम चरण (प्रारंभिक चरण)

यह चरण तब शुरू होता है जब शनि ग्रह व्यक्ति की चंद्र राशि से पहले वाली राशि में प्रवेश करता है। यह चरण मानसिक तनाव और जीवन में अस्थिरता का कारण बन सकता है। इस समय व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है और उसे धैर्य, अनुशासन और मानसिक स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता होती है।

2.द्वितीय चरण (मध्य चरण)

इस चरण में शनि ग्रह व्यक्ति की चंद्र राशि में प्रवेश करता है, जो साढ़ेसाती का सबसे कठिन समय होता है। इस चरण में व्यक्ति को स्वास्थ्य, करियर, और व्यक्तिगत संबंधों में समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इस समय विशेष पूजा और व्रत का पालन करना लाभकारी होता है।

3.तृतीय चरण (अंतिम चरण)

यह चरण तब शुरू होता है जब शनि व्यक्ति की चंद्र राशि से अगली राशि में प्रवेश करता है। इस चरण में जीवन में स्थिरता और समस्याओं के समाधान की शुरुआत होती है। इस समय नियमित पूजा और दान का पालन करना शुभ होता है।

शनि की ढैया के प्रभाव और उपाय

शनि की ढैया का प्रभाव भी साढ़ेसाती के समान ही होता है, लेकिन यह थोड़ा कम तीव्र होता है। ढैया के दौरान व्यक्ति को मानसिक तनाव, आर्थिक समस्याएँ, और पारिवारिक विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

1.मानसिक तनाव और समाधान

ढैया के दौरान मानसिक तनाव आम है। व्यक्ति को मानसिक स्थिरता बनाए रखने के लिए ध्यान, योग, और शनि मंत्र का जाप करना चाहिए। 'ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करना अत्यंत प्रभावी माना जाता है।

2.आर्थिक समस्याएँ और समाधान

ढैया के दौरान आर्थिक समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। व्यक्ति को अनावश्यक खर्चों से बचना चाहिए। शनिदेव के लिए लोहे, तिल, और काले वस्त्र का दान करना शुभ माना जाता है।

3.पारिवारिक विवाद और समाधान

ढैया के दौरान पारिवारिक संबंधों में तनाव उत्पन्न हो सकते हैं। संयम और धैर्य बनाए रखना आवश्यक है। परिवार के साथ धार्मिक कार्यों में भाग लेना और शनिदेव की पूजा करना लाभकारी होता है।

शनि के रत्न, धातु और अन्य उपाय

शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए रत्न, धातु, और अन्य उपायों का महत्वपूर्ण स्थान है।

1.नीलम रत्न

नीलम शनि का प्रिय रत्न है। इसे शनिवार के दिन पंचधातु में धारण करना चाहिए। नीलम धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना आवश्यक होता है।

2.लोहे का छल्ला

लोहे का छल्ला शनि के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है। इसे शनिवार के दिन धारण करना चाहिए।

3.शनिदेव के लिए विशेष पूजा और व्रत

शनिदेव के लिए शनिवार को विशेष पूजा करें और व्रत रखें। शनि अमावस्या के दिन विशेष पूजा और दान करना भी लाभकारी होता है।

प्रसिद्ध व्यक्तियों के जीवन में शनि का प्रभाव

इतिहास और वर्तमान में कई प्रसिद्ध व्यक्तियों ने शनि की साढ़ेसाती और ढैया का प्रभाव अनुभव किया है।

1.ऐतिहासिक उदाहरण

महाभारत के समय राजा विक्रमादित्य को शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव सहना पड़ा था।

2.वर्तमान समय के उदाहरण

कई प्रसिद्ध राजनेता, फिल्म सितारे, और व्यवसायी भी शनि के प्रभाव के चलते जीवन में बड़े बदलाव देख चुके हैं।

संयम और अनुशासन का महत्व

शनि की साढ़ेसाती और ढैया के दौरान संयम और अनुशासन का पालन अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। शनि व्यक्ति के जीवन में अनुशासन, धैर्य, और कड़ी मेहनत का महत्व समझाता है। जीवन में आने वाली चुनौतियों को स्वीकार करना और उन्हें सुधार का अवसर मानना व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है।

1. *मानसिकता में बदलाव*:

- शनि के प्रभाव के दौरान व्यक्ति को अपनी मानसिकता को सकारात्मक बनाए रखना चाहिए। जीवन में आने वाली कठिनाइयों को चुनौती के रूप में स्वीकार करें और आत्म-सुधार का प्रयास करें।

2. *धैर्य और अनुशासन*:

- शनि के समय में धैर्य और अनुशासन का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है। कड़ी मेहनत और अनुशासित जीवनशैली शनि की कृपा प्राप्त करने का मार्ग है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण

शनि ग्रह का प्रभाव केवल ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। शनि की गति और उसकी दृष्टि का प्रभाव पृथ्वी पर जीवन के विभिन्न पहलुओं पर पड़ता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, शनि ग्रह की गति और उसकी स्थिति के कारण उत्पन्न होने वाले बदलावों का विश्लेषण किया जा सकता है।

1.खगोल विज्ञान और ज्योतिष के बीच संबंध

शनि ग्रह की खगोल विज्ञान में स्थिति और उसका पृथ्वी पर प्रभाव, खगोल विज्ञान और वैदिक ज्योतिष के बीच के संबंध का विश्लेषण किया जा सकता है।

2.शनि की गति और उसका पृथ्वी पर प्रभाव

शनि की गति का पृथ्वी पर प्रभाव और उसका वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। शनि ग्रह के चक्रों का मानव जीवन पर प्रभाव वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी समझा जा सकता है।ा सकता है।

निष्कर्ष

शनि की साढ़ेसाती और ढैया जीवन में चुनौतियों और कठिनाइयों का समय हो सकता है, लेकिन सही दृष्टिकोण और उपायों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। जीवन में अनुशासन, धैर्य, और सकारात्मकता बनाए रखना शनि की कृपा प्राप्त करने का मार्ग है।

शनि की साढ़ेसाती ने इतिहास में कई महान व्यक्तित्वों के जीवन पर गहरा प्रभाव डाला है। इस प्रभाव के दौरान इन व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार के लाभ और हानि का अनुभव हुआ। यहां कुछ प्रमुख उदाहरण दिए जा रहे हैं, जो शनि की साढ़ेसाती के तीनों चरणों (प्रथम, द्वितीय, और तृतीय) में उन्हें प्राप्त हुए लाभ या हानि को दर्शाते हैं।

1. अटल बिहारी वाजपेयी

  • प्रथम चरण:
    • लाभ: अटल बिहारी वाजपेयी को राजनीति में शुरुआती सफलता मिली, उनकी भाषण कला ने उन्हें पहचान दिलाई।
    • हानि: पार्टी में अस्थिरता और संघर्ष का सामना करना पड़ा।
  • द्वितीय चरण:
    • लाभ: अटल जी ने प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की, और पोखरण परमाणु परीक्षण जैसी उपलब्धियों को हासिल किया।
    • हानि: कारगिल युद्ध और पार्टी में आंतरिक संघर्ष जैसी चुनौतियों का सामना किया।
  • तृतीय चरण:
    • लाभ: उन्होंने देश में शांति और स्थिरता लाने में योगदान दिया।
    • हानि: राजनीतिक अस्थिरता और स्वास्थ्य में गिरावट का सामना किया।

2. इंदिरा गांधी

  • प्रथम चरण:
    • लाभ: प्रधानमंत्री बनने की दिशा में उन्हें पार्टी में समर्थन मिला।
    • हानि: पार्टी के भीतर विभाजन और विरोध का सामना करना पड़ा।
  • द्वितीय चरण:
    • लाभ: उनके शासनकाल में हरित क्रांति और बांग्लादेश की स्वतंत्रता जैसी सफलताएँ मिलीं।
    • हानि: आपातकाल के दौरान जनता के विरोध का सामना करना पड़ा।
  • तृतीय चरण:
    • लाभ: सत्ता में वापसी हुई और भारत को एक मजबूत नेता के रूप में नेतृत्व प्रदान किया।
    • हानि: राजनीतिक अस्थिरता और अंततः उनकी हत्या।

3. महात्मा गांधी

  • प्रथम चरण:
    • लाभ: सत्याग्रह और अहिंसा के सिद्धांतों का विकास और प्रसार किया।
    • हानि: दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव का सामना करना पड़ा।
  • द्वितीय चरण:
    • लाभ: भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व किया और व्यापक जन समर्थन प्राप्त किया।
    • हानि: स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान कई बार जेल जाना पड़ा और परिवार से दूरी बनी रही।
  • तृतीय चरण:
    • लाभ: भारत की स्वतंत्रता में निर्णायक भूमिका निभाई।
    • हानि:

4. नेल्सन मंडेला

  • प्रथम चरण:
    • लाभ: रंगभेद के खिलाफ संघर्ष शुरू किया और अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।
    • हानि: संघर्ष के कारण गिरफ्तार होकर लंबी सजा का सामना किया।
  • द्वितीय चरण:
    • लाभ: जेल से रिहा होने के बाद दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने।
    • हानि: लंबे समय तक जेल में रहने से व्यक्तिगत जीवन में कठिनाइयाँ आईं।
  • तृतीय चरण:
    • लाभ: रंगभेद का अंत और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बने।
    • हानि: राजनीतिक चुनौतियों और आलोचनाओं का सामना किया।

5. अमिताभ बच्चन

  • प्रथम चरण:
    • लाभ: फ़िल्मी करियर में बड़ी सफलता, "जंजीर" जैसी हिट फिल्में मिलीं।
    • हानि: करियर में अस्थिरता और संघर्ष का सामना किया।
  • द्वितीय चरण:
    • लाभ: "शहंशाह" के रूप में फिल्मी दुनिया में फिर से स्थापित हुए।
    • हानि: "कुली" के सेट पर गंभीर चोट का सामना किया।
  • तृतीय चरण:
    • लाभ: "कौन बनेगा करोड़पति" के माध्यम से टीवी पर शानदार वापसी की।
    • हानि: आर्थिक संकट और एबीसीएल कंपनी की विफलता का सामना किया।
मेरा अनुभव

मैं एक ज्योतिषाचार्य के रूप में वर्षों से लोगों की कुंडलियों का अध्ययन और मार्गदर्शन करता आ रहा हूं। मेरे एक क्लाइंट, जो वर्तमान में मध्य प्रदेश कैडर के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं, उनके जीवन में शनि की साढ़ेसाती का अनुभव बहुत ही विशेष और महत्वपूर्ण रहा। उनके साथ जुड़कर मैंने उनके जीवन की इस जटिल अवधि का गहराई से विश्लेषण किया और उन्हें उचित ज्योतिषीय सलाह दी, जो उनके जीवन में संतुलन और सफलता लाने में सहायक रही।

जब उनकी साढ़ेसाती शुरू हुई, तो यह समय उनके जीवन में कई कठिनाइयाँ और चुनौतियाँ लेकर आया। इस अवधि के पहले चरण में, उन्होंने अपने करियर में बड़ी अस्थिरता का सामना किया। विभागीय बदलाव, अतिरिक्त कार्यभार, और कुछ व्यक्तिगत समस्याओं ने उनके जीवन को बहुत कठिन बना दिया। उन्होंने खुद को मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर महसूस किया, लेकिन मैंने उन्हें इस समय के लिए विशेष उपाय सुझाए, जिनसे उन्हें राहत मिली और वे अपनी स्थिति को संभाल सके

साढ़ेसाती के दूसरे चरण में, चुनौतियाँ और भी बढ़ गईं। उनके कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अवरोध आए, और व्यक्तिगत जीवन में भी समस्याओं का सामना करना पड़ा। यह समय उनके धैर्य और साहस की परीक्षा ले रहा था। मैंने उन्हें नियमित रूप से शनि पूजा और विशेष व्रत रखने की सलाह दी। उनके निरंतर प्रयास और हमारे द्वारा किए गए उपायों ने उन्हें इस कठिन समय में संतुलन बनाए रखने में मदद की।

साढ़ेसाती के तीसरे चरण में, जब शनि का गोचर अंतिम राशि में हुआ, तब उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे। उनके कार्यों की सराहना होने लगी, और उनकी नेतृत्व क्षमता को पहचान मिली। अंततः उन्हें "सचिन" का पद मिला, जो उनके जीवन की एक बड़ी उपलब्धि थी। इसके साथ ही, भारत सरकार ने उनके असाधारण योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया।

इस साढ़ेसाती ने उनके जीवन में कई तरह के अनुभव दिए—कभी चुनौतियाँ, तो कभी अद्वितीय उपलब्धियाँ। लेकिन इन सभी उतार-चढ़ावों के बीच, उन्होंने अपने धैर्य और दृढ़ संकल्प से न केवल अपने करियर को संभाला, बल्कि जीवन में स्थिरता और संतुलन भी प्राप्त किया। यह उनके लिए एक अनमोल समय था, जिसने उन्हें व्यक्तिगत और पेशेवर रूप से और भी मजबूत बना दिया।

इस अनुभव से मैंने भी सीखा कि शनि की साढ़ेसाती केवल कठिनाइयाँ नहीं लाती, बल्कि यह आत्मनिरीक्षण और आत्मसुधार का अवसर भी प्रदान करती है। सही दिशा में प्रयास और ज्योतिषीय उपायों का पालन करने से व्यक्ति इस अवधि को अपने लिए अनुकूल बना सकता है।

### निष्कर्ष

इन महान व्यक्तित्वों के जीवन में शनि की साढ़ेसाती ने तीनों चरणों में मिश्रित प्रभाव डाला। प्रथम चरण में उन्हें अक्सर प्रारंभिक संघर्ष का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प से लाभ प्राप्त किया। द्वितीय चरण में उन्हें बड़ी उपलब्धियाँ मिलीं, लेकिन यह समय भी अत्यधिक चुनौतियों से भरा रहा। तृतीय चरण में उन्हें कुछ स्थिरता और सफलता मिली, लेकिन इसके साथ ही उन्हें व्यक्तिगत या पेशेवर हानि का भी सामना करना पड़ा। शनि की साढ़ेसाती का यह प्रभाव दिखाता है कि जीवन में अनुशासन, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने से कठिनाइयों को पार किया जा सकता है।

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विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी (गजानन महाराज जी) का परिचय-

सिद्धांत ज्योतिष, वास्तु एवं मनोचिकित्सा केंद्र, शगुन मैरिज ब्यूरो एवं कृष्णा जेम्स एंड ज्वैलरी, जयपुर के संस्थापक एवं _"ज्योतिष का संविधान", "वास्तु शास्त्र एवं हस्तरेखा शास्त्र का संविधान", "लाल किताब की आचार संहिता", "जीवन मंत्रा" (ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तु एवं मनोविज्ञान का महासंगम)- जीवन के हर पहलू का संतुलन, "ब्रह्मांड के रहस्य" (सृष्टि, ऊर्जा और जीवन के शाश्वत सूत्र) ब्रह्मांड के प्रत्येक नियम का दिव्य और अद्वितीय अनावरण, "प्रकृति की आचार संहिता" (अनंत प्रकृति के गूढ़ रहस्यों की कुंजी) प्रकृति की अनदेखी शक्तियों का दिव्य पथ प्रदर्शन, "समुद्र शास्त्र के रहस्य" (समुद्र की शक्तियों से जीवन के भविष्य का मार्गदर्शन) हस्तरेखा और समुद्र के अनंत संकेतों के गूढ़ विज्ञान का समन्वय नामक नौ महान पुस्तक ग्रंथो के लेखक डॉ. कृष्ण कांत लवानियां जो कि "गजानन महाराज"(भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी संबोधित), "राष्ट्रीय पुरोहित, एस्ट्रोलॉजर ऑफ ताज & पिंक सिटी एवं वर्तमान विश्व नास्त्रेदमस", "मगध रत्न" (मगध अर्थात बिहार के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "कलिंगा महारत्न" (कलिंगा अर्थात उड़ीसा के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "देवभूमि पुरोहित" (देवभूमि अर्थात उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "एस्ट्रोलॉजर रक्षक" & "एस्ट्रोलॉजर संकट मोचन" (भारत सरकार के माननीय रक्षा मंत्री द्वारा संबोधित) एवं लेखक "वास्तु का स्वर्णिम पिटारा" (भारत सरकार के माननीय परिवहन मंत्री द्वारा संबोधित), "आधुनिक झारखंड के बिरसा मुंडा" (झारखंड के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित) एवं सर्वश्रेष्ठ प्रागज्योतिषीय पुस्तक के लेखक (प्रागज्योतिषपुर अर्थात असम के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित) आदि उप-नामों से प्रख्यात इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजर (अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 23 - वर्तमान अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 5) एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट (औरा स्कैनर टूल्स एंड टेक्निक्स साइंटिस्ट) हैं। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक्ट ईस्ट पॉलिसी के वास्तु प्रमुख है।दक्षिण के ब्राह्मणों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व स्थापित की गई ज्योतिषीय पीठों में से डॉक्टर लवानिया सौराष्ट्र, कुरुक्षेत्र, तिरुपति, ब्रज (श्रीधाम वृंदावन) एवं मदुरै ज्योतिषीय पीठ के अधिपति हैं।

डॉ.लवानिया जंतु विज्ञान, ह्यूमन साइकोलॉजी एवं ज्योतिष शास्त्र विषय में पी.एच.डी की डिग्री प्राप्त है तथा डॉ. कृष्णकांत लवानिया न केवल ज्योतिष और वास्तु के क्षेत्र में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता रखते हैं, बल्कि मनोविज्ञान के क्षेत्र में भी एक अग्रणी हस्ती के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के जटिल मुद्दों जैसे अवसाद, चिंता विकार, तनाव प्रबंधन, और संबंध परामर्श में अपनी गहरी अंतर्दृष्टि और संज्ञानात्मक विज्ञान के सिद्धांतों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। उनकी मनोवैज्ञानिक सेवाओं ने न केवल लोगों के व्यक्तिगत जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, बल्कि उन्हें मानसिक शांति और संतुलन की ओर भी प्रेरित किया है। डॉ. लवानिया का 23 वर्षों से अधिक का अनुभव और उनके द्वारा लागू की गई उन्नत तकनीकें जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) और तनाव प्रबंधन ने हजारों लोगों को अवसाद और चिंता के चंगुल से बाहर निकालकर जीवन में नया दृष्टिकोण और आत्मविश्वास प्रदान किया है। उनके परामर्श से न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, बल्कि उनके क्लाइंट्स ने जीवन के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता और समृद्धि प्राप्त की है, जिससे उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मनोवैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया है। जो भाषा, धारणा, स्मृति, ध्यान, तर्क, और भावनाओं में विशेषज्ञता रखते हैं, इन मानसिक प्रक्रियाओं के काम करने और एक-दूसरे के साथ बातचीत करने के तरीकों को समझने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी को उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा राज ज्योतिषी के पद पर संबोधित किया गया है। डॉ. लवानिया जी भारत के 23 से अधिक राज्यों के राज-भवनों की वास्तु ठीक करने का कीर्तिमान स्थापित करने वाले विश्व के प्रथम एवं एकमात्र ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ है।

वर्तमान समय में इनके द्वारा विभिन्न संस्थाओं के पद सुशोभित किए जा रहे हैं जिनमें पदाधिकारी- निरंजनी अखाड़ा, राज ज्योतिषी (उत्तर प्रदेश), आजीवन सदस्य- इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन (ISCA), आजीवन सदस्य- अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA), आजीवन सदस्य- इंडियन एसोसिएशन का क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट (IACP), उपाध्यक्ष-अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, राष्ट्रीय प्रवक्ता ब्राह्मण सभा, राष्ट्रीय महासचिव- ब्रह्म समाज एकता समिति, अध्यक्ष- भारतीय विज्ञान कांग्रेस ज्योतिष एवं वास्तु, अध्यक्ष- नास्त्रेदमस इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ वास्तु एवं ज्योतिष, वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु एक्सपर्ट- गणेशा स्पीक्स (बेजान दारूवाला जी द्वारा स्थापित), कार्यकर्ता- (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) विश्व हिंदू परिषद & बजरंग दल), उपाध्यक्ष- यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) एवं इंडियन स्प्रिंट राइडर्स- यूनियन साइकिलिस्ट इंटरनेशनल (UCI) स्विट्जरलैंड आदि है।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया अपनी क्षमताओं के अनुसार कई बार सम्मानित हो चुके हैं इनको राज ऋषि अवार्ड (उत्तराखंड), राज ज्योतिषी (उत्तरप्रदेश), मगध रत्न (बिहार), ज्योतिष पीठ शंकराचार्य, ज्योतिषीय रत्न, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष वाचस्पति अवार्ड 2009 एवं 2015, 2017, 2019, 2022 एवं 2023 बेस्ट एस्ट्रोलॉजर अवार्ड 2011, 2013, 2019 एवं 2023, अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष एवं वास्तु प्रज्ञान अवार्ड, नास्त्रेदमस उपाधि 2011, 2021 एवं 2024, जंतु विज्ञान विषय में उत्कृष्ट कार्य के लिए साइंटिस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड 2015, 2019 एवं 2022, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) अवार्ड- 2024 आदि से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया ने हत्या और संगीन अपराधिक गतिविधियों में लिप्त खूंखार अपराधियों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया है। इस परीक्षण के माध्यम से, उन्होंने इन अपराधियों के सामने आई सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, और भावनात्मक परिस्थितियों के सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया। अपने शोध कार्यों के निष्कर्षों के आधार पर, उन्होंने देश में 5 लाख से अधिक बाल्यावस्था और किशोरावस्था के बच्चों के लिए काउंसलिंग प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य इस आयु वर्ग के बच्चों में अपराधी गतिविधियों और विचारधाराओं को पनपने से रोकना है। डॉ. लवानिया का प्रमुख लक्ष्य है कि उनके द्वारा किए गए शोध कार्यों से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग करके बाल्यावस्था और किशोरावस्था के बच्चों की सोच को अपराध मुक्त किया जाए, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल और सुरक्षित हो सके और देश को अपराध मुक्त माहौल मिले।

डॉक्टर लवानिया एशिया के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषाचार्य स्वर्गीय बेजान दारूवाला जी के प्रमुख शिष्यों में रहे हैं, स्वर्गीय दारूवाला जी के साथ डॉ. लवानिया का ज्योतिषीय एवं वास्तु अनुभव अपने 23 वर्षों से अधिक अनुभव में से 12 वर्षों का रहा है, वर्तमान में भी डॉ. लवानिया दारूवाला जी द्वारा स्थापित ज्योतिषीय संस्था गणेशा स्पीक्स के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य हैं। डॉक्टर कृष्ण कांत लवानिया सिद्धांत ज्योतिष एवं वास्तु केंद्र एवं शगुन मैरिज ब्यूरो की भारत में लगभग 32 ऑफिसों का संचालन करते हैं इसमें लगभग 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं।

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