अंत्येष्टि संस्कार का मुहूर्त और उसका महत्व

अंत्येष्टि का मुहूर्त शास्त्रों और विज्ञान दोनों से सिद्ध है। गरुड़ पुराण, विष्णु धर्मसूत्र, यजुर्वेद, और आधुनिक विज्ञान में यह स्पष्ट किया गया है कि अंत्येष्टि का सही समय आत्मा की गति, शांति और मोक्ष के लिए अनिवार्य है। शरीर के विघटन, ऊर्जा का स्थानांतरण और आत्मा की यात्रा के लिए यह मुहूर्त अत्यंत आवश्यक है। शास्त्रों के अनुसार समय का पालन करने से आत्मा को शांति और परिवार को मानसिक संतुष्टि मिलती है।

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मुहूर्त का शास्त्रीय एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्व: प्रश्नों का विश्लेषण

मुहूर्त हमारे जीवन में एक सकारात्मक शक्ति का संचार करते हैं और ईश्वर की बनाई समय-व्यवस्था का पालन करते हैं। प्रत्येक कार्य के लिए शास्त्रों में एक मुहूर्त का विधान है जो प्राकृतिक ऊर्जा के संरेखण का सम्मान करता है। भगवान की इच्छा से जो शुभ समय मिलता है, उसका पालन करना जीवन में संतुलन, शांति और सफलता का मार्ग है। इसलिए, मुहूर्त का महत्व नकारना अधर्म और शास्त्रों का अपमान है।

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"राहुकाल: ज्योतिषीय, पौराणिक, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक पूर्ण विश्लेषण"

भारतीय ज्योतिष में राहुकाल का समय एक विशेष स्थान रखता है। इसे एक ऐसा समय माना गया है जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अनुपयुक्त होता है। यह अवधारणा केवल पौराणिक कथाओं और मान्यताओं पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें एक गहन ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी समाहित है। इस लेख में हम राहुकाल के महत्व, उसके शास्त्रगत और ज्योतिषीय पक्ष, पौराणिक संदर्भों और इसके वैज्ञानिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करेंगे।.

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*शनि की साढ़ेसाती और ढैया: प्रभाव, उपाय, और जीवन पर उनका महत्व

शनि की साढ़ेसाती और ढैया का विषय एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल ज्योतिषीय अवधारणा है। इसे समझना और इसके प्रभावों से निपटना हर व्यक्ति के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकता है। इस नोटिस में, शनि की साढ़ेसाती और ढैया के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है, ताकि आप इस विषय को गहराई से समझ सकें और इसे वीडियो में प्रस्तुत कर सकें।

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छठ पूजा: पौराणिक, धार्मिक, ज्योतिषीय, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से विस्तृत विश्लेषण

छठ पूजा भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है। विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, और नेपाल के तराई क्षेत्रों में यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। सूर्य देवता और छठी मइया की उपासना के साथ इस पर्व का ज्योतिष, वास्तु और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी गहन महत्व है। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक, डॉ. कृष्णकांत लवानिया, गजानन महाराज जी (श्री धाम वृंदावन) के हवाले से इस पर्व के ज्योतिषीय और आध्यात्मिक पहलुओं का विश्लेषण करेंगे।

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