अंत्येष्टि संस्कार का मुहूर्त और उसका महत्व

अंत्येष्टि संस्कार का मुहूर्त और उसका महत्व, शास्त्रों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दोनों से समझना आवश्यक है। यहां प्रमाण सहित इसका विवरण दिया गया है:

1. गरुड़ पुराण्भुत मेल

गरुड़ पुराण में मृत्यु और अंत्येष्टि संस्कार का विस्तृत वर्णन मिलता है। यह ग्रंथ आत्मा की गति और मृत्यु के बाद के संस्कारों का गूढ़ ज्ञान प्रदान करता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, मृत्यु के समय और अंत्येष्टि के मुहूर्त का प्रभाव आत्मा की शांति और उसके अगले जन्म पर पड़ता है। गरुड़ पुराण में स्पष्ट लिखा है कि अंत्येष्टि का शुभ समय चुनने से आत्मा को पवित्रता प्राप्त होती है और यह नए जीवन के लिए प्रेरित होती है। उदाहरण के लिए:
> "मृत्यु के पश्चात अंत्येष्टि संस्कार करने से आत्मा को शांति प्राप्त होती है और यह आगे के जीवन की यात्रा में सहायता करती है।" – गरुड़ पुराण, अध्याय 10
इसमें यह भी उल्लेख है कि अशुभ समय पर किए गए अंत्येष्टि से आत्मा की शांति में बाधा उत्पन्न हो सकती है और परिवार को नकारात्मक परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।

2.विष्णु धर्मसूत्र

विष्णु धर्मसूत्र में भी अंत्येष्टि संस्कार के लिए समय का महत्व बताया गया है। इस ग्रंथ के अनुसार, मृत्यु के बाद उचित मुहूर्त में संस्कार करने से आत्मा के लिए शुद्धिकरण और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। ग्रंथ में समय के चयन का उल्लेख है कि कैसे सही मुहूर्त में अंत्येष्टि से आत्मा की गति सरल और निरंतर बनी रहती है:
> "अंत्येष्टि संस्कार को सही समय पर संपन्न करने से आत्मा की गति सहज होती है और उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है।" – विष्णु धर्मसूत्र, अध्याय 19, श्लोक 2-3

3.वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ऊर्जा और शरीर का विघटन

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अंत्येष्टि के समय को दिन में चुनने के पीछे भी वैज्ञानिक कारण हैं। विज्ञान कहता है कि सूर्यास्त के बाद वातावरण में नमी और तापमान में बदलाव होता है, जिससे ऊर्जा का प्रवाह कम हो जाता है। सूर्यास्त के पहले का समय इसलिए उपयुक्त है ताकि आत्मा को ऊर्जा का आवश्यक प्रवाह मिल सके।
वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि सूर्य की उपस्थिति में कोशिकाओं और ऊतकों का विघटन तेजी से होता है और ऊर्जा का स्थानांतरण भी अनुकूल होता है। अग्नि के तत्व से जो गर्मी उत्पन्न होती है, वह एक प्रकार का शुद्धिकरण है जो जीवाणुओं और कीटाणुओं को नष्ट करता है और शरीर के विघटन में सहायक होता है।
> उदाहरण के लिए, बॉयोमेडिकल विज्ञान में यह पाया गया है कि अग्नि से उत्पन्न उच्च तापमान शरीर के तत्वों को नष्ट करता है और ऊर्जा का विसर्जन तेजी से करता है, जिससे पर्यावरण में जैविक संतुलन बना रहता है।

4. अग्नि तत्व और यजुर्वेद

यजुर्वेद में अग्नि को शुद्धिकरण का प्रतीक माना गया है। यजुर्वेद में अग्नि के तत्व को जीवन के अंत के साथ जोड़ते हुए कहा गया है कि अंत्येष्टि के समय अग्नि का प्रयोग आत्मा को नए जीवन की ओर प्रवाहित करता है। यजुर्वेद में अग्नि के तत्व का उल्लेख है कि यह आत्मा के पुराने कर्मों का शुद्धिकरण करता है और उसे पुनर्जन्म के लिए तैयार करता है:
> "अग्नि शरीर के पंचभूतों को उनके मूल में लौटा देती है, जिससे आत्मा को नया जीवन मिलता है।"– यजुर्वेद, अध्याय 40, श्लोक 15

5. आधुनिक विज्ञान और पर्यावरण संतुलन

आज के विज्ञान में भी यह मान्यता है कि शरीर का विघटन और उससे उत्पन्न तत्व पर्यावरण में पुनः समाहित हो जाते हैं। शरीर में निहित कार्बन, हाइड्रोजन और अन्य तत्व अंत्येष्टि के दौरान वायुमंडल में विलीन होते हैं, जिससे प्रकृति में जैविक संतुलन बना रहता है।
> अमेरिकी जीवविज्ञान अनुसंधान द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन में यह बताया गया है कि अंत्येष्टि के दौरान उत्सर्जित ऊर्जा वातावरण में अन्य तत्वों के साथ मिलकर संतुलन का निर्माण करती है और जीवन-चक्र को निरंतरता प्रदान करती है।

निष्कर्ष

अंत्येष्टि का मुहूर्त शास्त्रों और विज्ञान दोनों से सिद्ध है। गरुड़ पुराण, विष्णु धर्मसूत्र, यजुर्वेद, और आधुनिक विज्ञान में यह स्पष्ट किया गया है कि अंत्येष्टि का सही समय आत्मा की गति, शांति और मोक्ष के लिए अनिवार्य है। शरीर के विघटन, ऊर्जा का स्थानांतरण और आत्मा की यात्रा के लिए यह मुहूर्त अत्यंत आवश्यक है। शास्त्रों के अनुसार समय का पालन करने से आत्मा को शांति और परिवार को मानसिक संतुष्टि मिलती है।
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विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी (गजानन महाराज जी) का परिचय-

सिद्धांत ज्योतिष एवं वास्तु केंद्र, शगुन मैरिज ब्यूरो एवं कृष्णा जेम्स एंड ज्वैलरी, जयपुर के संस्थापक एवं "ज्योतिष का संविधान", "वास्तु शास्त्र एवं हस्तरेखा शास्त्र का संविधान", "लाल किताब की आचार संहिता", "जीवन मंत्रा" (ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तु एवं मनोविज्ञान का महासंगम)- "जीवन के हर पहलू का संतुलन" एवं ब्रह्मांड के रहस्य (सृष्टि, ऊर्जा और जीवन के शाश्वत सूत्र) "ब्रह्मांड के प्रत्येक नियम का दिव्य और अद्वितीय अनावरण" नामक पांच महान पुस्तक ग्रंथो के लेखक डॉ. कृष्ण कांत लवानियां जो कि "गजानन महाराज"(भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी संबोधित), "राष्ट्रीय पुरोहित, एस्ट्रोलॉजर ऑफ ताज & पिंक सिटी एवं वर्तमान विश्व नास्त्रेदमस", "मगध रत्न" (मगध अर्थात बिहार के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "कलिंगा महारत्न" (कलिंगा अर्थात उड़ीसा के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "देवभूमि पुरोहित" (देवभूमि अर्थात उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "एस्ट्रोलॉजर रक्षक" & "एस्ट्रोलॉजर संकट मोचन" (भारत सरकार के माननीय रक्षा मंत्री द्वारा संबोधित) एवं लेखक "वास्तु का स्वर्णिम पिटारा" (भारत सरकार के माननीय परिवहन मंत्री द्वारा संबोधित) एवं सर्वश्रेष्ठ प्रागज्योतिषीय पुस्तक के लेखक (प्रागज्योतिषपुर अर्थात असम के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित) आदि उप-नामों से प्रख्यात इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजर (अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 23 - वर्तमान अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 5) एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट (औरा स्कैनर टूल्स एंड टेक्निक्स साइंटिस्ट) हैं। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक्ट ईस्ट पॉलिसी के वास्तु प्रमुख है।दक्षिण के ब्राह्मणों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व स्थापित की गई ज्योतिषीय पीठों में से डॉक्टर लवानिया सौराष्ट्र, कुरुक्षेत्र, तिरुपति एवं मदुरै ज्योतिषीय पीठ के अधिपति हैं।

डॉ.लवानिया जंतु विज्ञान, ह्यूमन साइकोलॉजी एवं ज्योतिष शास्त्र विषय में पी.एच.डी की डिग्री प्राप्त है तथा डॉ. कृष्णकांत लवानिया न केवल ज्योतिष और वास्तु के क्षेत्र में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता रखते हैं, बल्कि मनोविज्ञान के क्षेत्र में भी एक अग्रणी हस्ती के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के जटिल मुद्दों जैसे अवसाद, चिंता विकार, तनाव प्रबंधन, और संबंध परामर्श में अपनी गहरी अंतर्दृष्टि और संज्ञानात्मक विज्ञान के सिद्धांतों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। उनकी मनोवैज्ञानिक सेवाओं ने न केवल लोगों के व्यक्तिगत जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, बल्कि उन्हें मानसिक शांति और संतुलन की ओर भी प्रेरित किया है। डॉ. लवानिया का 23 वर्षों से अधिक का अनुभव और उनके द्वारा लागू की गई उन्नत तकनीकें जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) और तनाव प्रबंधन ने हजारों लोगों को अवसाद और चिंता के चंगुल से बाहर निकालकर जीवन में नया दृष्टिकोण और आत्मविश्वास प्रदान किया है। उनके परामर्श से न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, बल्कि उनके क्लाइंट्स ने जीवन के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता और समृद्धि प्राप्त की है, जिससे उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मनोवैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया है। जो भाषा, धारणा, स्मृति, ध्यान, तर्क, और भावनाओं में विशेषज्ञता रखते हैं, इन मानसिक प्रक्रियाओं के काम करने और एक-दूसरे के साथ बातचीत करने के तरीकों को समझने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी को उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा राज ज्योतिषी के पद पर संबोधित किया गया है। डॉ. लवानिया जी भारत के 20 से अधिक राज्यों के राज-भवनों की वास्तु ठीक करने का कीर्तिमान स्थापित करने वाले विश्व के प्रथम एवं एकमात्र ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ है।

वर्तमान समय में इनके द्वारा विभिन्न संस्थाओं के पद सुशोभित किए जा रहे हैं जिनमें पदाधिकारी- निरंजनी अखाड़ा, राज ज्योतिषी (उत्तर प्रदेश), आजीवन सदस्य- इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन (ISCA), आजीवन सदस्य- अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA), आजीवन सदस्य- इंडियन एसोसिएशन का क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट (IACP), उपाध्यक्ष-अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, राष्ट्रीय प्रवक्ता ब्राह्मण सभा, राष्ट्रीय महासचिव- ब्रह्म समाज एकता समिति, अध्यक्ष- भारतीय विज्ञान कांग्रेस ज्योतिष एवं वास्तु, अध्यक्ष- नास्त्रेदमस इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ वास्तु एवं ज्योतिष, वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु एक्सपर्ट- गणेशा स्पीक्स (बेजान दारूवाला जी द्वारा स्थापित), कार्यकर्ता- (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) विश्व हिंदू परिषद & बजरंग दल), उपाध्यक्ष- यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) एवं इंडियन स्प्रिंट राइडर्स- यूनियन साइकिलिस्ट इंटरनेशनल (UCI) स्विट्जरलैंड आदि है।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया अपनी क्षमताओं के अनुसार कई बार सम्मानित हो चुके हैं इनको राज ऋषि अवार्ड (उत्तराखंड), राज ज्योतिषी (उत्तरप्रदेश), मगध रत्न (बिहार), ज्योतिष पीठ शंकराचार्य, ज्योतिषीय रत्न, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष वाचस्पति अवार्ड 2009 एवं 2015, 2017, 2019, 2022 एवं 2023 बेस्ट एस्ट्रोलॉजर अवार्ड 2011, 2013, 2019 एवं 2023, अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष एवं वास्तु प्रज्ञान अवार्ड, नास्त्रेदमस उपाधि 2011, 2021 एवं 2024, जंतु विज्ञान विषय में उत्कृष्ट कार्य के लिए साइंटिस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड 2015, 2019 एवं 2022, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) अवार्ड- 2024 आदि से सम्मानित किया जा चुका है

डॉ. कृष्णकांत लवानिया ने हत्या और संगीन अपराधिक गतिविधियों में लिप्त खूंखार अपराधियों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया है। इस परीक्षण के माध्यम से, उन्होंने इन अपराधियों के सामने आई सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, और भावनात्मक परिस्थितियों के सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया। अपने शोध कार्यों के निष्कर्षों के आधार पर, उन्होंने देश में 5 लाख से अधिक बाल्यावस्था और किशोरावस्था के बच्चों के लिए काउंसलिंग प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य इस आयु वर्ग के बच्चों में अपराधी गतिविधियों और विचारधाराओं को पनपने से रोकना है। डॉ. लवानिया का प्रमुख लक्ष्य है कि उनके द्वारा किए गए शोध कार्यों से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग करके बाल्यावस्था और किशोरावस्था के बच्चों की सोच को अपराध मुक्त किया जाए, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल और सुरक्षित हो सके और देश को अपराध मुक्त माहौल मिले।

डॉक्टर लवानिया एशिया के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषाचार्य स्वर्गीय बेजान दारूवाला जी के प्रमुख शिष्यों में रहे हैं, स्वर्गीय दारूवाला जी के साथ डॉ. लवानिया का ज्योतिषीय एवं वास्तु अनुभव अपने 23 वर्षों से अधिक अनुभव में से 12 वर्षों का रहा है, वर्तमान में भी डॉ. लवानिया दारूवाला जी द्वारा स्थापित ज्योतिषीय संस्था गणेशा स्पीक्स के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य हैं। डॉक्टर कृष्ण कांत लवानिया सिद्धांत ज्योतिष एवं वास्तु केंद्र एवं शगुन मैरिज ब्यूरो की भारत में लगभग 32 ऑफिसों का संचालन करते हैं इसमें लगभग 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं

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