राहुकाल: ज्योतिषीय, पौराणिक, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से एक पूर्ण विश्लेषण

भारतीय ज्योतिष में राहुकाल का समय एक विशेष स्थान रखता है। इसे एक ऐसा समय माना गया है जो किसी भी शुभ कार्य के लिए अनुपयुक्त होता है। यह अवधारणा केवल पौराणिक कथाओं और मान्यताओं पर आधारित नहीं है, बल्कि इसमें एक गहन ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी समाहित है। इस लेख में हम राहुकाल के महत्व, उसके शास्त्रगत और ज्योतिषीय पक्ष, पौराणिक संदर्भों और इसके वैज्ञानिक पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

1. राहुकाल का ज्योतिषीय विवेचन

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में राहु एक छाया ग्रह है, जिसका अस्तित्व सूर्य और चंद्रमा की कक्षाओं के परस्पर काटने वाले बिंदुओं पर होता है। राहु का प्रभाव किसी भी कुंडली में महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह भ्रम, छल, आकस्मिकता, और अप्रत्याशित घटनाओं का प्रतीक है। राहु की स्थिति से व्यक्ति के जीवन में मानसिक अस्थिरता, भ्रम, और अत्यधिक आकांक्षाओं का अनुभव हो सकता है।

राहुकाल का समय निर्धारण

राहुकाल का समय सूर्योदय से सूर्यास्त के समय को आठ भागों में बाँटकर निकाला जाता है। यह समय प्रत्येक दिन बदलता है और इस समय के दौरान राहु का प्रभाव सक्रिय माना जाता है। प्रत्येक दिन के लिए राहुकाल का समय इस प्रकार होता है:

  • सोमवार – सुबह 7:30 से 9:00 तक
  • मंगलवार – दोपहर 3:00 से 4:30 तक
  • बुधवार – दोपहर 12:00 से 1:30 तक
  • गुरुवार – दोपहर 1:30 से 3:00 तक
  • शुक्रवार – सुबह 10:30 से 12:00 तक
  • शनिवार – सुबह 9:00 से 10:30 तक
  • रविवार – शाम 4:30 से 6:00 तक

राहुकाल का उद्देश्य किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले उस कार्य में आने वाली बाधाओं को समझने का संकेत देना है। इसके कारण लोग इस समय में कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, यात्रा, नया व्यवसाय, या धार्मिक अनुष्ठान नहीं करते हैं।

2. पौराणिक कथा और राहु का महत्व

राहु का जन्म एक असुर के रूप में हुआ था। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान, राहु ने देवताओं को छल से अमृत पान कर लिया था। भगवान विष्णु ने उसे पहचान लिया और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया, लेकिन अमरत्व प्राप्त करने के कारण वह जीवित रहा। इस घटना के बाद राहु को ग्रहों में स्थान दिया गया और उसे सूर्य तथा चंद्रमा का शत्रु माना गया। इस कारण राहु को सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगाने का श्राप मिला।

3. राहुकाल का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

राहुकाल का विश्लेषण वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी किया जा सकता है। जब एक निश्चित समय को ‘अशुभ’ घोषित कर दिया जाता है, तो लोगों के मन में उस समय के प्रति नकारात्मक भावनाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। यह एक प्रकार का प्लेसिबो प्रभाव है, जहाँ व्यक्ति अपने मानसिक विश्वासों के कारण राहुकाल को नकारात्मक मानता है। इसे मनोवैज्ञानिक रूप से देखा जाए, तो राहुकाल के दौरान व्यक्ति में सतर्कता की भावना बढ़ जाती है और वह अनजाने में जोखिम भरे कार्य करने से बचता है।

4.राहुकाल के दौरान निषिद्ध कार्य

राहुकाल के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं करने की सलाह दी जाती है। इसका कारण यह है कि इस समय राहु का नकारात्मक प्रभाव होता है, जो किसी भी नए कार्य में बाधाएँ डाल सकता है। राहुकाल के दौरान विशेष रूप से निम्नलिखित कार्य करने से मना किया गया है:

  • शुभ कार्य: जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय का आरंभ।
  • पूजा-पाठ: राहुकाल के दौरान किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को करने से मना किया गया है।
  • यात्रा: नए स्थान पर जाने से पहले राहुकाल के समय को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।
राहुकाल के प्रभाव से बचने के उपाय

राहुकाल के प्रभाव से बचने के लिए कुछ उपाय सुझाए जाते हैं:

  • राहु के मंत्रों का जाप जैसे "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः"।
  • राहु से संबंधित वस्तुओं का दान, जैसे काला कपड़ा, काले तिल, या नीले रंग की वस्तुएं।
  • इस दौरान हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करना राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकता है।
निष्कर्ष

राहुकाल भारतीय ज्योतिष, पौराणिक मान्यताओं, और सांस्कृतिक आस्थाओं में गहरे रूप से स्थापित एक समय है। इसका महत्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक पक्ष भी महत्वपूर्ण हैं। राहुकाल का समय अशुभ माना जाता है, और इस दौरान कार्य करने से बचने की परंपरा भारतीय समाज में व्यापक रूप से प्रचलित है। चाहे यह मान्यता वास्तविक बाधाओं से बचने का एक प्रतीकात्मक तरीका हो या मानसिक संतुलन बनाए रखने का, राहुकाल का महत्व सदियों से हमारे सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा बना हुआ है।

राहुकाल का पालन करने या न करने का निर्णय व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है, परंतु इसका शास्त्रगत, पौराणिक और वैज्ञानिक आधार इसे भारतीय समाज में एक सम्मानजनक स्थान प्रदान करता है। यदि आप अपने जीवन में तनावग्रस्त हैं, आपकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, और हर तरफ से निराशा एवं दुर्भाग्य आपका पीछा कर रहा है, तो अब समय आ गया है परिवर्तन का। मिलिए हमारे विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी (गजानन महाराज जी- श्रीधाम वृंदावन) से, जिनकी ज्योतिष और वास्तु में विश्व में 23 वीं रैंक है। उनके पास है आपके जीवन से जुड़ी हर समस्या का समाधान। उनके ज्योतिषीय एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श से अपने जीवन के हर पहलू का संतुलन प्राप्त करें।

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विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी (गजानन महाराज जी) का परिचय-

सिद्धांत ज्योतिष, वास्तु एवं मनोचिकित्सा केंद्र, शगुन मैरिज ब्यूरो एवं कृष्णा जेम्स एंड ज्वैलरी, जयपुर के संस्थापक एवं _"ज्योतिष का संविधान", "वास्तु शास्त्र एवं हस्तरेखा शास्त्र का संविधान", "लाल किताब की आचार संहिता", "जीवन मंत्रा" (ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तु एवं मनोविज्ञान का महासंगम)- जीवन के हर पहलू का संतुलन, "ब्रह्मांड के रहस्य" (सृष्टि, ऊर्जा और जीवन के शाश्वत सूत्र) ब्रह्मांड के प्रत्येक नियम का दिव्य और अद्वितीय अनावरण, "प्रकृति की आचार संहिता" (अनंत प्रकृति के गूढ़ रहस्यों की कुंजी) प्रकृति की अनदेखी शक्तियों का दिव्य पथ प्रदर्शन, "समुद्र शास्त्र के रहस्य" (समुद्र की शक्तियों से जीवन के भविष्य का मार्गदर्शन) हस्तरेखा और समुद्र के अनंत संकेतों के गूढ़ विज्ञान का समन्वय नामक नौ महान पुस्तक ग्रंथो के लेखक डॉ. कृष्ण कांत लवानियां जो कि "गजानन महाराज"(भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी संबोधित), "राष्ट्रीय पुरोहित, एस्ट्रोलॉजर ऑफ ताज & पिंक सिटी एवं वर्तमान विश्व नास्त्रेदमस", "मगध रत्न" (मगध अर्थात बिहार के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "कलिंगा महारत्न" (कलिंगा अर्थात उड़ीसा के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "देवभूमि पुरोहित" (देवभूमि अर्थात उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "एस्ट्रोलॉजर रक्षक" & "एस्ट्रोलॉजर संकट मोचन" (भारत सरकार के माननीय रक्षा मंत्री द्वारा संबोधित) एवं लेखक "वास्तु का स्वर्णिम पिटारा" (भारत सरकार के माननीय परिवहन मंत्री द्वारा संबोधित), "आधुनिक झारखंड के बिरसा मुंडा" (झारखंड के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित) एवं सर्वश्रेष्ठ प्रागज्योतिषीय पुस्तक के लेखक (प्रागज्योतिषपुर अर्थात असम के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित) आदि उप-नामों से प्रख्यात इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजर (अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 23 - वर्तमान अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 5) एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट (औरा स्कैनर टूल्स एंड टेक्निक्स साइंटिस्ट) हैं। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक्ट ईस्ट पॉलिसी के वास्तु प्रमुख है।दक्षिण के ब्राह्मणों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व स्थापित की गई ज्योतिषीय पीठों में से डॉक्टर लवानिया सौराष्ट्र, कुरुक्षेत्र, तिरुपति, ब्रज (श्रीधाम वृंदावन) एवं मदुरै ज्योतिषीय पीठ के अधिपति हैं।

डॉ.लवानिया जंतु विज्ञान, ह्यूमन साइकोलॉजी एवं ज्योतिष शास्त्र विषय में पी.एच.डी की डिग्री प्राप्त है तथा डॉ. कृष्णकांत लवानिया न केवल ज्योतिष और वास्तु के क्षेत्र में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता रखते हैं, बल्कि मनोविज्ञान के क्षेत्र में भी एक अग्रणी हस्ती के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के जटिल मुद्दों जैसे अवसाद, चिंता विकार, तनाव प्रबंधन, और संबंध परामर्श में अपनी गहरी अंतर्दृष्टि और संज्ञानात्मक विज्ञान के सिद्धांतों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। उनकी मनोवैज्ञानिक सेवाओं ने न केवल लोगों के व्यक्तिगत जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, बल्कि उन्हें मानसिक शांति और संतुलन की ओर भी प्रेरित किया है। डॉ. लवानिया का 23 वर्षों से अधिक का अनुभव और उनके द्वारा लागू की गई उन्नत तकनीकें जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) और तनाव प्रबंधन ने हजारों लोगों को अवसाद और चिंता के चंगुल से बाहर निकालकर जीवन में नया दृष्टिकोण और आत्मविश्वास प्रदान किया है। उनके परामर्श से न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, बल्कि उनके क्लाइंट्स ने जीवन के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता और समृद्धि प्राप्त की है, जिससे उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मनोवैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया है। जो भाषा, धारणा, स्मृति, ध्यान, तर्क, और भावनाओं में विशेषज्ञता रखते हैं, इन मानसिक प्रक्रियाओं के काम करने और एक-दूसरे के साथ बातचीत करने के तरीकों को समझने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी को उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा राज ज्योतिषी के पद पर संबोधित किया गया है। डॉ. लवानिया जी भारत के 23 से अधिक राज्यों के राज-भवनों की वास्तु ठीक करने का कीर्तिमान स्थापित करने वाले विश्व के प्रथम एवं एकमात्र ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ है।

वर्तमान समय में इनके द्वारा विभिन्न संस्थाओं के पद सुशोभित किए जा रहे हैं जिनमें पदाधिकारी- निरंजनी अखाड़ा, राज ज्योतिषी (उत्तर प्रदेश), आजीवन सदस्य- इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन (ISCA), आजीवन सदस्य- अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA), आजीवन सदस्य- इंडियन एसोसिएशन का क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट (IACP), उपाध्यक्ष-अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, राष्ट्रीय प्रवक्ता ब्राह्मण सभा, राष्ट्रीय महासचिव- ब्रह्म समाज एकता समिति, अध्यक्ष- भारतीय विज्ञान कांग्रेस ज्योतिष एवं वास्तु, अध्यक्ष- नास्त्रेदमस इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ वास्तु एवं ज्योतिष, वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु एक्सपर्ट- गणेशा स्पीक्स (बेजान दारूवाला जी द्वारा स्थापित), कार्यकर्ता- (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) विश्व हिंदू परिषद & बजरंग दल), उपाध्यक्ष- यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) एवं इंडियन स्प्रिंट राइडर्स- यूनियन साइकिलिस्ट इंटरनेशनल (UCI) स्विट्जरलैंड आदि है।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया अपनी क्षमताओं के अनुसार कई बार सम्मानित हो चुके हैं इनको राज ऋषि अवार्ड (उत्तराखंड), राज ज्योतिषी (उत्तरप्रदेश), मगध रत्न (बिहार), ज्योतिष पीठ शंकराचार्य, ज्योतिषीय रत्न, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष वाचस्पति अवार्ड 2009 एवं 2015, 2017, 2019, 2022 एवं 2023 बेस्ट एस्ट्रोलॉजर अवार्ड 2011, 2013, 2019 एवं 2023, अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष एवं वास्तु प्रज्ञान अवार्ड, नास्त्रेदमस उपाधि 2011, 2021 एवं 2024, जंतु विज्ञान विषय में उत्कृष्ट कार्य के लिए साइंटिस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड 2015, 2019 एवं 2022, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) अवार्ड- 2024 आदि से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया ने हत्या और संगीन अपराधिक गतिविधियों में लिप्त खूंखार अपराधियों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया है। इस परीक्षण के माध्यम से, उन्होंने इन अपराधियों के सामने आई सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, और भावनात्मक परिस्थितियों के सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया। अपने शोध कार्यों के निष्कर्षों के आधार पर, उन्होंने देश में 5 लाख से अधिक बाल्यावस्था और किशोरावस्था के बच्चों के लिए काउंसलिंग प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य इस आयु वर्ग के बच्चों में अपराधी गतिविधियों और विचारधाराओं को पनपने से रोकना है। डॉ. लवानिया का प्रमुख लक्ष्य है कि उनके द्वारा किए गए शोध कार्यों से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग करके बाल्यावस्था और किशोरावस्था के बच्चों की सोच को अपराध मुक्त किया जाए, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल और सुरक्षित हो सके और देश को अपराध मुक्त माहौल मिले।

डॉक्टर लवानिया एशिया के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषाचार्य स्वर्गीय बेजान दारूवाला जी के प्रमुख शिष्यों में रहे हैं, स्वर्गीय दारूवाला जी के साथ डॉ. लवानिया का ज्योतिषीय एवं वास्तु अनुभव अपने 23 वर्षों से अधिक अनुभव में से 12 वर्षों का रहा है, वर्तमान में भी डॉ. लवानिया दारूवाला जी द्वारा स्थापित ज्योतिषीय संस्था गणेशा स्पीक्स के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य हैं। डॉक्टर कृष्ण कांत लवानिया सिद्धांत ज्योतिष एवं वास्तु केंद्र एवं शगुन मैरिज ब्यूरो की भारत में लगभग 32 ऑफिसों का संचालन करते हैं इसमें लगभग 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं।

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