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पौराणिक और धार्मिक दृष्टिकोण

छठ पूजा की उत्पत्ति महाभारत और रामायण जैसे प्राचीन ग्रंथों में पाई जाती है। महाभारत में सूर्यपुत्र कर्ण और रामायण में भगवान राम और माता सीता द्वारा की गई सूर्योपासना को इस पर्व का आधार माना जाता है।

  • महाभारत काल

    सूर्य पुत्र कर्ण प्रतिदिन कमर तक जल में खड़े होकर सूर्य देवता की उपासना करते थे, और उनकी इस तपस्या को आज के छठ पर्व की परंपरा के रूप में देखा जाता है। यह पूजा जीवन में संघर्षों का सामना करने की शक्ति देती है।

  • रामायण काल

    अयोध्या लौटने के बाद भगवान राम और माता सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्य की उपासना की थी। यह उपासना, छठ पूजा के रूप में विकसित हुई और इसे सूर्य देवता और छठी मइया की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण

डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी के अनुसार, छठ पूजा का ज्योतिषीय महत्व अत्यंत गूढ़ है। सूर्य को नवग्रहों में प्रमुख स्थान प्राप्त है और इसे आत्मा का प्रतीक माना जाता है। कुंडली में सूर्य की स्थिति हमारे जीवन में सफलता, आत्म-विश्वास और प्रतिष्ठा का निर्धारण करती है। छठ पूजा के दौरान सूर्योपासना से कुंडली में सूर्य की स्थिति को मजबूत किया जा सकता है, जो संतान सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि प्रदान करने में सहायक है।

  • सूर्य की स्थिति का महत्व

    डॉ. लवानिया का मानना है कि जो लोग छठ पूजा करते हैं, उनकी कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इससे मानसिक दृढ़ता, आत्म-विश्वास और समाज में प्रतिष्ठा बढ़ती है। विशेष रूप से संतान सुख और संतान की उन्नति के लिए सूर्य की उपासना अत्यंत लाभकारी होती है।

  • सूर्य और संतान योग

    ज्योतिष के अनुसार, सूर्य संतान का कारक ग्रह भी माना गया है। छठ पूजा के दौरान सूर्य की उपासना से संतान प्राप्ति के योग प्रबल होते हैं। जो दंपत्ति संतान प्राप्ति में समस्या का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह पर्व विशेष रूप से फलदायी माना गया है।

  • शत्रु ग्रहों का निवारण

    ज्योतिषीय दृष्टि से छठ पूजा करने से शनि, राहु और केतु जैसे ग्रहों का नकारात्मक प्रभाव कम होता है। डॉ. लवानिया के अनुसार, इस पूजा से जातक के जीवन में शत्रुओं का प्रभाव कम होता है और उसे मानसिक शांति प्राप्त होती है।

वास्तु और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी के अनुसार, छठ पूजा का वास्तु दृष्टिकोण से भी विशेष महत्व है। इस पर्व में जल, मिट्टी, और सूर्य की ऊर्जा का सामंजस्य होता है जो वास्तु दोषों का निवारण करने में सहायक होता है।

  • सूर्य और दिशा संतुलन

    वास्तु में सूर्य का पूर्व दिशा से विशेष संबंध है। छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देने की प्रक्रिया पूर्व दिशा के वास्तु दोषों का निवारण करती है। डॉ. लवानिया के अनुसार, जिन घरों में पूर्व दिशा में दोष होते हैं, वहां सूर्य की उपासना से वास्तु दोष का निवारण किया जा सकता है।

  • जल चिकित्सा का महत्व

    छठ पूजा में जल का विशेष महत्व होता है। जल में खड़े होकर सूर्य की उपासना करने से शरीर के सभी अंगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह प्रक्रिया आयुर्वेद में 'जल चिकित्सा' के रूप में जानी जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।

  • सूर्य की पराबैंगनी किरणें

    सूर्य को अर्घ्य देने का समय सूर्योदय और सूर्यास्त के समय होता है। इस समय सूर्य की पराबैंगनी किरणें त्वचा के लिए लाभकारी होती हैं और विटामिन डी का उत्पादन करती हैं, जो हड्डियों को मजबूत करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है।

छठ पूजा की धार्मिक विधि और अनुष्ठान

छठ पूजा को चार दिनों तक विशेष विधि-विधान से मनाया जाता है। यह एक कठोर तपस्या है जिसमें व्रती भूख-प्यास का त्याग कर अपने आराध्य को प्रसन्न करते हैं।

  • पहला दिन (नहाय-खाय)

    पहले दिन व्रती पवित्र नदी में स्नान कर शुद्ध भोजन ग्रहण करते हैं, जो शरीर और मन की शुद्धि का प्रतीक है।

  • दूसरा दिन (खरना)

    दूसरे दिन व्रती दिनभर उपवास रखकर संध्या समय गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं, और उसके बाद निर्जला उपवास शुरू होता है।

  • तीसरा दिन (संध्या अर्घ्य)

    तीसरे दिन व्रती डूबते सूर्य को जल में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं, जो सूर्य देवता को धन्यवाद देने और उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रतीक है।

  • चौथा दिन (उषा अर्घ्य)

    अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, जो जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

छठ पूजा भारतीय समाज में सामाजिक एकता और सामूहिकता का प्रतीक है। इस पर्व में जाति, धर्म, और सामाजिक भेदभाव को भुलाकर सभी लोग एकजुट होकर पूजा करते हैं।

  • सामाजिक एकता

    छठ पूजा के दौरान विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ आकर पूजा करते हैं, जिससे समाज में एकता और सद्भावना का संदेश मिलता है। डॉ. लवानिया कहते हैं कि यह पर्व हमारे समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जो सभी के लिए कल्याणकारी है।

  • पर्यावरण संरक्षण

    छठ पूजा में पर्यावरण की रक्षा का भी संदेश है। इस पर्व में प्राकृतिक सामग्री जैसे बाँस की टोकरी, मिट्टी के दीप, और पवित्र जल का उपयोग किया जाता है, जो पर्यावरण के अनुकूल हैं और इससे पर्यावरण संरक्षण की भावना जागृत होती है।

निष्कर्ष

छठ पूजा भारतीय संस्कृति का एक अद्वितीय पर्व है, जिसमें पौराणिक, धार्मिक, ज्योतिषीय, वास्तु और वैज्ञानिक सभी दृष्टिकोणों का समावेश है। यह पर्व न केवल हमारे धार्मिक विश्वासों को मजबूत करता है, बल्कि हमारे समाज में एकता, स्वास्थ्य, और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी देता है।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी के अनुसार, इस पर्व की परंपराओं और विधियों का पालन करके हम अपने जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि ला सकते हैं। छठ पूजा न केवल सूर्य और छठी मइया की कृपा प्राप्त करने का माध्यम है, बल्कि यह हमारे जीवन में नई ऊर्जा, सुख, और शांति का संचार करता है।

छठ पूजा की पूजा-विधियों का पालन, सूर्य देवता और छठी मइया के प्रति असीम श्रद्धा, और समाज में समरसता का यह पर्व हमें जीवन के हर पहलू में संतुलन और संपूर्ण खुशहाली का अनुभव कराता है।

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विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी (गजानन महाराज जी) का परिचय-

सिद्धांत ज्योतिष, वास्तु एवं मनोचिकित्सा केंद्र, शगुन मैरिज ब्यूरो एवं कृष्णा जेम्स एंड ज्वैलरी, जयपुर के संस्थापक एवं _"ज्योतिष का संविधान", "वास्तु शास्त्र एवं हस्तरेखा शास्त्र का संविधान", "लाल किताब की आचार संहिता", "जीवन मंत्रा" (ज्योतिष, हस्तरेखा, वास्तु एवं मनोविज्ञान का महासंगम)- जीवन के हर पहलू का संतुलन, "ब्रह्मांड के रहस्य" (सृष्टि, ऊर्जा और जीवन के शाश्वत सूत्र) ब्रह्मांड के प्रत्येक नियम का दिव्य और अद्वितीय अनावरण, "प्रकृति की आचार संहिता" (अनंत प्रकृति के गूढ़ रहस्यों की कुंजी) प्रकृति की अनदेखी शक्तियों का दिव्य पथ प्रदर्शन, "समुद्र शास्त्र के रहस्य" (समुद्र की शक्तियों से जीवन के भविष्य का मार्गदर्शन) हस्तरेखा और समुद्र के अनंत संकेतों के गूढ़ विज्ञान का समन्वय नामक नौ महान पुस्तक ग्रंथो के लेखक डॉ. कृष्ण कांत लवानियां जो कि "गजानन महाराज"(भारत के माननीय प्रधानमंत्री जी संबोधित), "राष्ट्रीय पुरोहित, एस्ट्रोलॉजर ऑफ ताज & पिंक सिटी एवं वर्तमान विश्व नास्त्रेदमस", "मगध रत्न" (मगध अर्थात बिहार के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "कलिंगा महारत्न" (कलिंगा अर्थात उड़ीसा के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "देवभूमि पुरोहित" (देवभूमि अर्थात उत्तराखंड के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित), "एस्ट्रोलॉजर रक्षक" & "एस्ट्रोलॉजर संकट मोचन" (भारत सरकार के माननीय रक्षा मंत्री द्वारा संबोधित) एवं लेखक "वास्तु का स्वर्णिम पिटारा" (भारत सरकार के माननीय परिवहन मंत्री द्वारा संबोधित), "आधुनिक झारखंड के बिरसा मुंडा" (झारखंड के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित) एवं सर्वश्रेष्ठ प्रागज्योतिषीय पुस्तक के लेखक (प्रागज्योतिषपुर अर्थात असम के महामहिम राज्यपाल द्वारा संबोधित) आदि उप-नामों से प्रख्यात इंटरनेशनल एस्ट्रोलॉजर (अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 23 - वर्तमान अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग 5) एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट (औरा स्कैनर टूल्स एंड टेक्निक्स साइंटिस्ट) हैं। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक्ट ईस्ट पॉलिसी के वास्तु प्रमुख है।दक्षिण के ब्राह्मणों द्वारा हजारों वर्ष पूर्व स्थापित की गई ज्योतिषीय पीठों में से डॉक्टर लवानिया सौराष्ट्र, कुरुक्षेत्र, तिरुपति, ब्रज (श्रीधाम वृंदावन) एवं मदुरै ज्योतिषीय पीठ के अधिपति हैं।

डॉ.लवानिया जंतु विज्ञान, ह्यूमन साइकोलॉजी एवं ज्योतिष शास्त्र विषय में पी.एच.डी की डिग्री प्राप्त है तथा डॉ. कृष्णकांत लवानिया न केवल ज्योतिष और वास्तु के क्षेत्र में विश्वस्तरीय विशेषज्ञता रखते हैं, बल्कि मनोविज्ञान के क्षेत्र में भी एक अग्रणी हस्ती के रूप में प्रतिष्ठित हैं। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के जटिल मुद्दों जैसे अवसाद, चिंता विकार, तनाव प्रबंधन, और संबंध परामर्श में अपनी गहरी अंतर्दृष्टि और संज्ञानात्मक विज्ञान के सिद्धांतों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। उनकी मनोवैज्ञानिक सेवाओं ने न केवल लोगों के व्यक्तिगत जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है, बल्कि उन्हें मानसिक शांति और संतुलन की ओर भी प्रेरित किया है। डॉ. लवानिया का 23 वर्षों से अधिक का अनुभव और उनके द्वारा लागू की गई उन्नत तकनीकें जैसे संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) और तनाव प्रबंधन ने हजारों लोगों को अवसाद और चिंता के चंगुल से बाहर निकालकर जीवन में नया दृष्टिकोण और आत्मविश्वास प्रदान किया है। उनके परामर्श से न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ है, बल्कि उनके क्लाइंट्स ने जीवन के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता और समृद्धि प्राप्त की है, जिससे उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मनोवैज्ञानिक के रूप में स्थापित किया है। जो भाषा, धारणा, स्मृति, ध्यान, तर्क, और भावनाओं में विशेषज्ञता रखते हैं, इन मानसिक प्रक्रियाओं के काम करने और एक-दूसरे के साथ बातचीत करने के तरीकों को समझने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया जी को उत्तरप्रदेश सरकार द्वारा राज ज्योतिषी के पद पर संबोधित किया गया है। डॉ. लवानिया जी भारत के 23 से अधिक राज्यों के राज-भवनों की वास्तु ठीक करने का कीर्तिमान स्थापित करने वाले विश्व के प्रथम एवं एकमात्र ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु विशेषज्ञ है।

वर्तमान समय में इनके द्वारा विभिन्न संस्थाओं के पद सुशोभित किए जा रहे हैं जिनमें पदाधिकारी- निरंजनी अखाड़ा, राज ज्योतिषी (उत्तर प्रदेश), आजीवन सदस्य- इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन (ISCA), आजीवन सदस्य- अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA), आजीवन सदस्य- इंडियन एसोसिएशन का क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट (IACP), उपाध्यक्ष-अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा, राष्ट्रीय प्रवक्ता ब्राह्मण सभा, राष्ट्रीय महासचिव- ब्रह्म समाज एकता समिति, अध्यक्ष- भारतीय विज्ञान कांग्रेस ज्योतिष एवं वास्तु, अध्यक्ष- नास्त्रेदमस इंटरनेशनल फाउंडेशन ऑफ वास्तु एवं ज्योतिष, वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य एवं वास्तु एक्सपर्ट- गणेशा स्पीक्स (बेजान दारूवाला जी द्वारा स्थापित), कार्यकर्ता- (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) विश्व हिंदू परिषद & बजरंग दल), उपाध्यक्ष- यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) एवं इंडियन स्प्रिंट राइडर्स- यूनियन साइकिलिस्ट इंटरनेशनल (UCI) स्विट्जरलैंड आदि है।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया अपनी क्षमताओं के अनुसार कई बार सम्मानित हो चुके हैं इनको राज ऋषि अवार्ड (उत्तराखंड), राज ज्योतिषी (उत्तरप्रदेश), मगध रत्न (बिहार), ज्योतिष पीठ शंकराचार्य, ज्योतिषीय रत्न, ज्योतिष भूषण, ज्योतिष वाचस्पति अवार्ड 2009 एवं 2015, 2017, 2019, 2022 एवं 2023 बेस्ट एस्ट्रोलॉजर अवार्ड 2011, 2013, 2019 एवं 2023, अंतर्राष्ट्रीय ज्योतिष एवं वास्तु प्रज्ञान अवार्ड, नास्त्रेदमस उपाधि 2011, 2021 एवं 2024, जंतु विज्ञान विषय में उत्कृष्ट कार्य के लिए साइंटिस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड 2015, 2019 एवं 2022, अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन (APA) अवार्ड- 2024 आदि से सम्मानित किया जा चुका है।

डॉ. कृष्णकांत लवानिया ने हत्या और संगीन अपराधिक गतिविधियों में लिप्त खूंखार अपराधियों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण किया है। इस परीक्षण के माध्यम से, उन्होंने इन अपराधियों के सामने आई सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, और भावनात्मक परिस्थितियों के सभी पहलुओं का गहन अध्ययन किया। अपने शोध कार्यों के निष्कर्षों के आधार पर, उन्होंने देश में 5 लाख से अधिक बाल्यावस्था और किशोरावस्था के बच्चों के लिए काउंसलिंग प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य इस आयु वर्ग के बच्चों में अपराधी गतिविधियों और विचारधाराओं को पनपने से रोकना है। डॉ. लवानिया का प्रमुख लक्ष्य है कि उनके द्वारा किए गए शोध कार्यों से प्राप्त निष्कर्षों का उपयोग करके बाल्यावस्था और किशोरावस्था के बच्चों की सोच को अपराध मुक्त किया जाए, जिससे उनका भविष्य उज्ज्वल और सुरक्षित हो सके और देश को अपराध मुक्त माहौल मिले।

डॉक्टर लवानिया एशिया के सर्वश्रेष्ठ ज्योतिषाचार्य स्वर्गीय बेजान दारूवाला जी के प्रमुख शिष्यों में रहे हैं, स्वर्गीय दारूवाला जी के साथ डॉ. लवानिया का ज्योतिषीय एवं वास्तु अनुभव अपने 23 वर्षों से अधिक अनुभव में से 12 वर्षों का रहा है, वर्तमान में भी डॉ. लवानिया दारूवाला जी द्वारा स्थापित ज्योतिषीय संस्था गणेशा स्पीक्स के वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य हैं। डॉक्टर कृष्ण कांत लवानिया सिद्धांत ज्योतिष एवं वास्तु केंद्र एवं शगुन मैरिज ब्यूरो की भारत में लगभग 32 ऑफिसों का संचालन करते हैं इसमें लगभग 10,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त ज्योतिषाचार्य, वास्तु गुरु एवं मनोवैज्ञानिक मार्गदर्शक इनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं।

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