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कुंडली दोष

कुंडली दोष क्या है? कुंडली में कितने प्रकार के दोष होते हैं? कुंडली में दोष कैसे बनते हैं? क्या कुंडली में मौजूद दोषों का निवारण किया जा सकता है? जो भी जातक अपनी कुंडली दिखाना चाहता है उसका वास्ता इन सवालों से जरूर पड़ता होगा। असल में कुंडली बताती क्या है? आपका भविष्य! और आपका भविष्य कैसे निर्धारित होता है? वह होता है आपकी कुंडली में ग्रहों की दशा व दिशा से ग्रहों की यही दशा, स्थिति आपकी कुंडली में योग व दोष बनने का कारण बनती हैं। योग शुभ भी होते हैं और अशुभ भी जो अशुभ योग होते हैं उन्हें दोष भी कहते हैं? काल सर्प दोष, नाड़ी दोष, पितृदोष, श्रापित दोष आदि अनेक प्रकार के दोष कुंडली में देखे जाते हैं।

यह कुंडली में बन रहे दोष की स्थिति पर निर्भर करता है। यह दोष अल्पकाल के लिये भी बन सकते हैं और दीर्घकाल के लिये भी। जो दोष जातक की जन्मकुंडली में बनते हैं यदि उनका उपाय न किया जाये तो ज्योतिषशास्त्र की मान्यताओं के अनुसार जातक के जीवन पर इन दोषों का प्रभाव दीर्घकाल तक बना रहता है। मसलन मांगलिक दोष से मुक्ति पाने के लिये जातक को किसी मांगलिक से ही विवाह करना पड़ता है या फिर अन्य ज्योतिषीय उपाय करने पड़ते हैं। इसी प्रकार कालसर्प दोष से मुक्ति भी तभी मिलती है जब इस दोष का उपाय कर लिया जाये। इसी प्रकार यदि शनि से संबंधित दोष है तो इसकी अवधि भी लंबी होती है। साढ़े सात साल तक तो शनि की साढ़े साती प्रभावित करती है। जन्म के समय यदि कुंडली के किसी भाव में कोई ग्रह नीच अवस्था में है तो उस ग्रह का उस भाव में शुभ फल मिलता। श्रापित दोष किसी भी जातक की कुंडली में राहु और शनि की युति होने से बनता है। मान्यता है कि यह दोष जातक के पूर्वजन्मों के फल से बनता है।